कटनी। नगर निगम के आला अधिकारियों और अतिक्रमण दस्ते की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। शहर के मुख्य बाजार में गजानन कॉम्प्लेक्स के ठीक बगल में स्थित नसरवन के बाड़ा में चल रहा अवैध निर्माण अब सिर्फ दावों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निर्माणकर्ताओं ने निगम प्रशासन को सीधे चुनौती दे दी है। नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में सोते रहे और उधर बिना नक्शा पास कराए दो दुकानों की छत भी ढल गई और शटर तक लग गए!
यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि शहर के बीचों-बीच नियम-कानूनों की धज्जियां किस कदर उड़ाई जा रही हैं और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
अधिकारियों की नाक के नीचे ‘खेल’, आम जनता हैरान
शहर का मुख्य बाजार, जहां हर वक्त नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की आवाजाही रहती है, वहां 20,400 वर्ग फुट के इस विवादित हिस्से में इतनी बड़ी लापरवाही को अंजाम दे दिया गया।
* अवैध निर्माण को पंख: पिछले दिनों शुरू हुआ निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में पहुंचने लगा है। दो दुकानों का ढांचा पूरी तरह तैयार होकर, छत ढलने के बाद शटर भी ठुक चुके हैं।
* निगम का दोहरा चरित्र: आम आदमी अगर अपनी जमीन पर बिना अनुमति के एक ईंट भी रख दे, तो निगम का अमला दल-बल के साथ जुर्माना ठोकने पहुंच जाता है। लेकिन नसरवन के बाड़े में बिना किसी वैधानिक अनुमति के दुकानें बनकर तैयार हो गईं और आला अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी—यह बात किसी के गले नहीं उतर रही।
32 खरीदारों का पेंच और करोड़ों का वारा-न्यारा
गौरतलब है कि वर्ष 2012 में नियमों को ताक पर रखकर इस बेशकीमती जमीन को 32 खरीदारों को बिना रोड और बिना पार्किंग की व्यवस्था किए बेच दिया गया था।
* 14 साल से अटका है नक्शा: नियम और शर्तों का पालन न होने के कारण पिछले 14 वर्षों से नगर निगम ने इस जमीन का नक्शा स्वीकृत नहीं किया है। लेकिन इसके बावजूद पिछले 15-20 दिनों से यहां दिन-रात काम चला और अब दुकानें शटर सहित खड़ी हो चुकी हैं।
सवाल: आखिर अधिकारी और अमला मौन क्यों?
* दुकानों पर शटर लग जाना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि निर्माणकर्ताओं को नगर निगम के ही कुछ रसूखदार जनप्रतिनिधियों और ऊंचे रसूख वाले आला अधिकारियों का सीधा और मजबूत संरक्षण प्राप्त है।
* क्या नगर निगम के आला अधिकारियों को शहर के बीचों-बीच चल रहे इतने बड़े निर्माण की सच में जानकारी नहीं थी, या जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं?
* दो दुकानों की छत ढलने और शटर लगने तक उड़नदस्ता और भवन शाखा के जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे?
* क्या अब इस तैयार हो चुके अवैध ढांचे पर नगर निगम का ‘बुलडोजर’ चलेगा या फिर कागजी खानापूर्ति करके मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
* शहर के मुख्य बाजार में बिना पार्किंग और बिना रोड के खड़ी हो रही ये दुकानें आने वाले समय में बड़े ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था का कारण बनेंगी। लेकिन जब रसूखदारों की सेटिंग मजबूत हो, तो जनता की सहूलियत की परवाह किसे है?

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
