सिंधिया समर्थकों की सूची पर दिल्ली की ‘ना’: 11 महीने बाद भी अटकी मप्र भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति भोपाल। मध्य प्रदेश भाजपा में संगठन के पुनर्गठन को लेकर अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कार्यकाल 11 महीने पूरा होने के बाद भी नई प्रदेश कार्यसमिति का गठन नहीं हो सका है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा सौंपी गई समर्थकों की लंबी-चौड़ी सूची और दिल्ली हाईकमान के ‘नो स्पेशल ट्रीटमेंट’ के रुख के बीच ‘टीम खंडेलवाल’ का ऐलान अधर में लटक गया है।

सिंधिया समर्थकों की सूची पर दिल्ली की ‘ना’: 11 महीने बाद भी अटकी मप्र भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति
भोपाल। मध्य प्रदेश भाजपा में संगठन के पुनर्गठन को लेकर अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कार्यकाल 11 महीने पूरा होने के बाद भी नई प्रदेश कार्यसमिति का गठन नहीं हो सका है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा सौंपी गई समर्थकों की लंबी-चौड़ी सूची और दिल्ली हाईकमान के ‘नो स्पेशल ट्रीटमेंट’ के रुख के बीच ‘टीम खंडेलवाल’ का ऐलान अधर में लटक गया है।

‘नियम और निष्ठा’ के बीच फंसा पेंच
सूत्रों के मुताबिक, सिंधिया ने उन नेताओं की एक बड़ी सूची पार्टी नेतृत्व को सौंपी है जो या तो पिछला चुनाव हार चुके हैं या जिन्हें टिकट नहीं मिल सका था।
पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि 2020 से 2023 के बीच सरकार बनाने और बचाने जैसी असाधारण परिस्थितियां थीं, जिसके तहत सिंधिया और अन्य दलों से आए नेताओं के समर्थकों को एडजस्ट करने की छूट दी गई थी। लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं है। पार्टी किसी दबाव में नहीं है और अब किसी को भी ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ नहीं दिया जाएगा।

‘जंबो समिति’ बनाम संगठनात्मक गाइडलाइन
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के कार्यकाल (जून 2021) में सिंधिया समर्थकों को साधने के लिए 403 सदस्यों की एक भारी-भरकम ‘जंबो कार्यसमिति’ बनाई गई थी, जिसे संगठन से ज्यादा ‘राजनीतिक समझौता’ माना गया था। इसमें विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या ही 218 पहुंच गई थी।
हालांकि, भाजपा की वास्तविक संगठनात्मक गाइडलाइन के तहत कुल स्वीकृत संख्या 157 ही है:
* मुख्य कार्यसमिति सदस्य: अधिकतम 106
* स्थायी आमंत्रित सदस्य: लगभग 25
* विशेष आमंत्रित सदस्य: 26 (मूल संख्या का 25%)

बड़ा सवाल: इस सीमित ढांचे में सिंधिया गुट के सैकड़ों समर्थकों की सिफारिशों को समाहित करना संगठन के लिए असंभव साबित हो रहा है।

बीएल संतोष का सख्त संदेश: ‘गाइडलाइन का अक्षरशः पालन करें’
गतिरोध को सुलझाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पिछले दिनों दिल्ली में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष से मुलाकात की थी। सूत्रों के अनुसार, बीएल संतोष ने सख्त रुख अपनाते हुए दो टूक कहा है कि संगठन की गाइडलाइन का अक्षरशः (Strictly) पालन किया जाए और नियमों से कोई समझौता न हो।

मई में घोषणा का दावा भी हुआ फेल
बता दें कि 28 अप्रैल को भोपाल में ‘पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान’ की बैठक में खंडेलवाल ने राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश की ओर मुखातिब होकर कहा था कि अनुमति मिलने पर मई में कार्यसमिति घोषित कर ओरछा में पहली बैठक कर ली जाएगी। इसके बाद मीडिया से भी एक-दो दिन में सूची जारी होने का दावा किया गया था, लेकिन लंबा इंतजार बीतने के बाद भी सूची जारी नहीं हो सकी है।

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