उद्योगपति मित्तल पर किसान की जमीन हड़पने का आरोप, कलेक्टर और एसपी से शिकायत

उद्योगपति मित्तल पर किसान की जमीन हड़पने का आरोप, कलेक्टर और एसपी से शिकायत

1.27 हेक्टेयर जमीन पर बाउंड्रीवॉल बनाकर जबरन कब्जा करने का मामला; मानसिक प्रताड़ना से पीड़ित को आया था ब्रेन हैम्रेज

कटनी। कटनी जिले के बड़वारा तहसील अंतर्गत ग्राम चांदन से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां क्षेत्र के रसूखदार उद्योगपति ललित कुमार मित्तल पर एक किसान की बेशकीमती जमीन जबरन हड़पने और उस पर अवैध रूप से बाउंड्रीवॉल खड़ी करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित किसान ने मामले की लिखित शिकायत कटनी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) से करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम चांदन (तहसील बड़वारा) निवासी फरियादी हरि प्रसाद पांडे (पुत्र ओंकार प्रसाद पांडे) के नाम पर ग्राम चांदन में खसरा नंबर 227, रकबा 1.27 हेक्टेयर (लगभग 3.20 एकड़) निजी स्वामित्व की भूमि है। इसी भूमि से लगी हुई जमीन पर कटनी के उद्योगपति ललित कुमार मित्तल एक उद्योग (फैक्ट्री) स्थापित कर रहे हैं।

21 लाख का सौदा, फिर ₹14 लाख में रजिस्ट्री का दबाव
शिकायत के मुताबिक, 17 अगस्त 2020 को ललित मित्तल और ओंकार प्रसाद पांडे के बीच उक्त भूमि को लेकर 21 लाख रुपए में एक विक्रय अनुबंध (एग्रीमेंट) हुआ था। अनुबंध की शर्तों के अनुसार, सरकारी रिकॉर्ड के अवलोकन और जमीन के सीमांकन के बाद तीन महीने के भीतर यानी 16 नवंबर 2020 तक रजिस्ट्री कराई जानी थी।
आरोप है कि जब पीड़ित पक्ष ने रजिस्ट्री के लिए ललित मित्तल से लगातार संपर्क किया, तो मित्तल ने मौके पर जमीन कम होने का बहाना बना दिया। इसके बाद सौदे की रकम 21 लाख रुपए से घटाकर महज 14 लाख रुपए में रजिस्ट्री कराने का मानसिक दबाव बनाया जाने लगा।

तनाव में किसान को आया ब्रेन हैम्रेज
पीड़ित ओंकार प्रसाद पांडे ने बताया कि उन्हें अपने पुत्र के विवाह के लिए रुपयों की सख्त जरूरत थी, इसलिए उन्होंने मित्तल से तयशुदा रकम पर रजिस्ट्री करने को कहा। लेकिन उद्योगपति द्वारा लगातार कम पैसों के लिए बनाए जा रहे मानसिक दबाव के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें ब्रेन हैम्रेज हो गया। गंभीर हालत में उन्हें इलाज के लिए नागपुर ले जाना पड़ा।
इस बीच अनुबंध की समय-सीमा (वैधता) भी समाप्त हो गई। पीड़ित का कहना है कि अब उनके बेटे की शादी संपन्न हो चुकी है और उन्हें रुपयों की आवश्यकता नहीं है, इसलिए वे समय-सीमा खत्म होने के बाद अपनी जमीन बेचना नहीं चाहते।

रसूख के बल पर जबरन कब्जा और बाउंड्रीवॉल
किसान हरि प्रसाद पांडे का आरोप है कि सौदे की समय-सीमा खत्म होने के बावजूद ललित मित्तल उनकी जमीन हड़पने पर आमादा हैं। उद्योगपति अपने रसूख और प्रभाव का इस्तेमाल कर पीड़ित की 1.27 हेक्टेयर निजी भूमि पर जबरन कब्जा कर चुके हैं और वहां पक्की बाउंड्रीवॉल भी खड़ी कर दी है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से अपनी पैतृक भूमि वापस दिलाने और दोषी उद्योगपति पर दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

इनका कहना है
“जमीन के लिए बकायदा पक्का एग्रीमेंट किया गया था और कुछ राशि एडवांस (बयाना) के तौर पर भी दी गई थी। अनुबंध के मुताबिक, शेष राशि प्राप्त कर पांडे को रजिस्ट्री करनी चाहिए थी, जो उन्होंने नहीं की। अब हम इस मामले को कोर्ट में ले गए हैं और माननीय कोर्ट ने इस पर स्टे दे दिया है।”
– ललित कुमार मित्तल, उद्योगपति (जैसा उन्होंने दैनिक भास्कर को बयान दिया है, शब्दशः वही है)

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