भोपाल/मध्यप्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की पदस्थापना में संतुलन न बन पाने के कारण मैदानी प्रशासनिक व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। लोकसभा चुनाव के पूर्व शुरू हुआ प्रशासनिक फेरबदल अब तक पटरी पर नहीं लौट सका है। स्थिति यह है कि प्रदेश के करीब 20 जिलों में अपर कलेक्टर (एडीएम) के नियमित पद लंबे समय से रिक्त हैं, जिससे न केवल शासकीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं बल्कि युवा अधिकारियों में असंतोष भी बढ़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े जिलों में एडीएम के दो से तीन पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहाँ भी नियमित नियुक्तियाँ नहीं हो पाई हैं। वर्तमान में कलेक्टर्स को अतिरिक्त प्रभार सौंपकर काम चलाना पड़ रहा है, जिससे निर्णय प्रक्रिया धीमी हो रही है।
मंत्रालयों में सीमित किए जा रहे मैदानी सेवा के अफसर
असंतुलन का यह असर केवल एडीएम ही नहीं, बल्कि संयुक्त कलेक्टर और एसडीएम स्तर के पदों पर भी देखा जा रहा है। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का कहना है कि फील्ड में उपलब्ध क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। कई युवा अधिकारियों को जिलों में जिम्मेदारी देने के बजाय मंत्रालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में अवर सचिव या ओएसडी (ओएसडी) बनाकर केवल फाइलों के काम में लगा दिया गया है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि फील्ड पोस्टिंग से ही अधिकारियों में प्रशासनिक अनुभव और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था के चलते नई पीढ़ी के अफसरों का मनोबल प्रभावित हो रहा है।
इन जिलों में स्थिति गंभीर
वर्तमान में जबलपुर, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, सीहोर, शाजापुर, बुरहानपुर, ग्वालियर, छतरपुर, निवाड़ी और इंदौर सहित कई जिलों में एडीएम के पद रिक्त हैं, जहाँ व्यवस्थाएं अतिरिक्त प्रभार के भरोसे हैं।
आईएएस और एसएएस में अवसरों का अंतर
अधिकारियों के अनुसार, जिला पंचायतों में सीईओ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बड़ी संख्या में युवा आईएएस अधिकारियों की तैनाती की जा रही है। इसके कारण राज्य प्रशासनिक सेवा (एसएएस) के अधिकारियों को फील्ड में काम करने के अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे प्रशासनिक स्तर पर असंतुलन और गहरा गया है।

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
