कटनी /पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले कटनी मुड़वारा रेलवे स्टेशन पर संचालित लॉन-कम-कंटेनर रेस्टोरेंट का टेंडर विवादों के घेरे में आ गया है। इस पूरी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता को ताक पर रखकर चहेतों को लाभ पहुंचाने और वित्तीय अनियमितताएं बरतने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले को लेकर विकास भागवत ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत पश्चिम मध्य रेलवे प्रशासन से बिंदुवार विस्तृत जानकारी मांगी गई है, जिसके बाद से ही रेलवे के वाणिज्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
आरोप नंबर 1: टेंडर की मूल लोकेशन में हेरफेर और बड़ा भू-भाग आवंटित
RTI आवेदन के माध्यम से जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वह रेस्टोरेंट की जगह (लोकेशन) को बदलना है।
क्या है आरोप?
आरोप है कि रेलवे द्वारा जारी किए गए प्रारंभिक टेंडर दस्तावेज (NIT) में जिस स्थान को रेस्टोरेंट के लिए चिन्हित और प्रदर्शित किया गया था, वास्तविक आवंटन के समय उसे पूरी तरह बदल दिया गया।
चहेतों को फायदा?
नियमों को दरकिनार कर चयनित लाइसेंसधारी को न सिर्फ दूसरी जगह दी गई, बल्कि मूल नक्शे से कहीं अधिक बड़ा और व्यावसायिक रूप से अधिक कीमती भू-भाग उपलब्ध करा दिया गया।
रेलवे से जवाब तलब:
RTI के जरिए पूछा गया है कि इस लोकेशन परिवर्तन का क्या औचित्य था? इससे संबंधित फाइल नोटिंग, सक्षम अधिकारी की निरीक्षण रिपोर्ट और विभाग के आंतरिक पत्राचार की प्रमाणित कॉपियां उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या इस बदलाव की सूचना टेंडर में शामिल अन्य बोलीदाताओं को दी गई थी?
आरोप नंबर 2: ‘डबल स्टोरी स्ट्रक्चर’ का निर्माण और नीतियों का उल्लंघन
कंटेनर रेस्टोरेंट के भौतिक ढांचे को लेकर भी रेलवे की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्टेशन परिसर में नियमों के विपरीत दो मंजिला निर्माण किए जाने की बात सामने आई है।
क्या दो मंजिला निर्माण की अनुमति थी?
टेंडर की मूल शर्तों के अनुसार केवल अस्थायी कंटेनर स्ट्रक्चर की अनुमति होती है। ऐसे में आवेदन में पूछा गया है कि क्या इस टेंडर में ‘दो मंजिला निर्माण या किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण की अनुमति थी?
NFR Policy के उल्लंघन का संदेह:
यदि यह अनुमति दी गई, तो उससे संबंधित तकनीकी ड्राइंग, लेआउट और प्रशासनिक स्वीकृति के आदेश सार्वजनिक किए जाएं। इसके अलावा, *Non-Fare Revenue Policy (NFR Policy CC-2/2017)* के तहत दी गई किसी भी विशेष छूट या आदेश की प्रति भी मांगी गई है, जिससे यह साफ हो सके कि कहीं नियमों को जानबूझकर शिथिल तो नहीं किया गया।
*टेंडर प्रक्रिया और तकनीकी पात्रता की जांच मामले की जड़ तक जाने के लिए टेंडर प्रक्रिया से जुड़े सभी गोपनीय और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की मांग की गई है, जिनमें शामिल हैं:
1. वित्तीय पारदर्शिता
टेंडर प्रक्रिया के दौरान कुल कितनी बोलियां (Bids) प्राप्त हुईं? चयनित बोलीदाता ने प्रति वर्ष कितना लाइसेंस शुल्क कोट किया था और उसकी फाइनेंशियल बिड समरी क्या थी?
2.पात्रता दस्तावेजों पर संशय:
चयनित फर्म/व्यक्ति की तकनीकी योग्यता को परखने के लिए उनके द्वारा जमा किए गए PAN, GST, बैंक सॉल्वेंसी और समान कार्य अनुभव प्रमाणपत्रों की प्रतियां मांगी गई हैं, ताकि यह जांचा जा सके कि फर्म वास्तव में इस टेंडर के योग्य थी या नहीं।
3.इसके अलावा Tender Notice, LOA (Letter of Award), Agreement Copy और Site Handover Report की प्रतियां भी मांगी गई हैं।
रेलवे के जवाब पर टिकी नजरें
इस RTI आवेदन ने कटनी मुड़वारा स्टेशन पर चल रहे इस कमर्शियल प्रोजेक्ट को पूरी तरह से संदेहास्पद बना दिया है। यदि आवेदन में उठाए गए सवाल सही साबित होते हैं, तो यह सीधे तौर पर रेलवे के राजस्व को नुकसान पहुंचाने और टेंडरिंग प्रक्रिया में बड़े भ्रष्टाचार का मामला बन सकता है।इस पूरे घटनाक्रम पर रेलवे प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जानकारों का कहना है कि रेलवे की ओर से RTI का अंतिम जवाब आने और दस्तावेजों के मिलान के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी कि यह केवल प्रक्रियात्मक चूक है या फिर एक सोची-समझी अनियमितता।

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
