नई दिल्ली, / सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाईकोर्ट्स और निचली अदालतों को फैसले सुनाने में होने वाली देरी रोकने के लिए महत्वपूर्ण और बाध्यकारी निर्देश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि समय पर न्याय देना न्यायपालिका की मूल जिम्मेदारी है और अदालतों में लंबित फैसलों को अनिश्चितकाल तक रोके रखना स्वीकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी हाईकोर्ट लंबित मामलों में अधिकतम तीन महीने के भीतर फैसला सुनाएं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फैसले के मुख्य हिस्से को सुनाए जाने की तारीख ही निर्णय की आधिकारिक तारीख मानी जाएगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि समय पर निर्णय सुनाना न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
