बेतवा नदी पर बन रहा करोड़ों का पुल ताश के पत्तों की तरह ढहा, मलबे में दबने से 6 मजदूरों की दर्दनाक मौत
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में बड़ा हादसा: तेज आंधी-तूफान भी नहीं झेल सका निर्माणाधीन स्ट्रक्चर; निर्माण की गुणवत्ता और ठेकेदार पर उठे गंभीर सवाल
हमीरपुर (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और सरकारी दावों की पोल खोलने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। यहाँ बेतवा नदी पर बन रहा करोड़ों की लागत का एक निर्माणाधीन पुल कल रात आई तेज आंधी और तूफान के कारण भरभराकर ढह गया। इस भीषण हादसे में पुल के पास सो रहे 5 से 6 मजदूरों की मलबे में दबकर मौत हो गई। घटना के बाद से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और प्रशासनिक अमला मौके पर राहत कार्य में जुटा है।
रात के अंधेरे में काल बना मलबा, सोने गए मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला
मिली जानकारी के अनुसार, बेतवा नदी पर इस महत्वपूर्ण पुल का निर्माण कार्य चल रहा था। कल रात अचानक मौसम का मिजाज बदला और तेज हवाओं के साथ भारी आंधी-तूफान शुरू हो गया। इसी दौरान निर्माणाधीन पुल का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया।
हादसा इतना भीषण और अप्रत्याशित था कि पुल के नीचे और आसपास अस्थाई टेंटों में सो रहे मजदूरों को भागने तक का मौका नहीं मिला। भारी-भरकम गर्डर और कंक्रीट के मलबे के नीचे दबने से 6 श्रमिकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, प्रशासन ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें भारी मशीनों और क्रेन के साथ मौके पर पहुंच गईं। रात से ही मलबे को हटाने और दबे हुए शवों को बाहर निकालने का काम जारी है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार: “हमारी पहली प्राथमिकता मलबे को पूरी तरह साफ करना और यह सुनिश्चित करना है कि नीचे कोई और न फंसा हो। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मृतकों के परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है।”
खोखले विकास की खुली पोल: आंधी से गिरा पुल या भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा?
इस दर्दनाक हादसे ने सीधे तौर पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और ठेका कंपनी की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जो बुनियादी ढांचा (Infrastructure) एक रात की तेज आंधी का दबाव भी नहीं झेल सका, वह भविष्य में आम जनता के लिए कितना सुरक्षित होता? स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री में भारी हेरफेर और घटिया स्तर के कंक्रीट के इस्तेमाल का आरोप लगाया है।
इन गंभीर बिंदुओं पर खड़े हो रहे हैं सवाल:
* सुरक्षा मानकों की अनदेखी: निर्माणाधीन और संवेदनशील भारी ढांचे के ठीक नीचे या बेहद करीब मजदूरों के सोने की व्यवस्था क्यों की गई थी? क्या सुरक्षा ऑडिट नहीं हुआ था?
* डिजाइन या मटेरियल की खामी: क्या पुल के पिलर और गर्डर की सेटिंग में तकनीकी लापरवाही बरती गई, जिससे वह तेज हवाओं का वेग भी नहीं सह पाया?
* जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?: इतने बड़े हादसे और 6 बेकसूर जिंदगियों की मौत के बाद क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार पर गैर-जमानती धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज होगी?

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
