विजयराघवगढ़ में महानदी से रेत का अवैध खेल: आम जनता के लिए कानून की सख्ती, रसूखदारों को 150 डंपर प्रतिदिन की खुली छूट

विजयराघवगढ़ में महानदी से रेत का अवैध खेल: आम जनता के लिए कानून की सख्ती, रसूखदारों को 150 डंपर प्रतिदिन की खुली छूट
कटनी: क्षेत्र में बहने वाली जीवनदायिनी महानदी एक बार फिर रेत माफियाओं के चंगुल में है। स्थानीय प्रशासन के दावों और ‘सरेंडर’ के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए विजयराघवगढ़ क्षेत्र से प्रतिदिन 100 से 150 डंपर अवैध रेत का बेखौफ उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहाँ एक ओर आम जनता और स्थानीय किसानों पर कानून का डंडा चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर रसूखदार रेत माफिया प्रशासन की नाक के नीचे करोड़ों का वारा-न्यारा कर रहे हैं।

आम जनता पर सख्ती, माफिया पर मेहरबानी
कुछ समय पहले प्रशासन की ओर से महानदी की सभी रेत खदानों को सरेंडर करने का फरमान जारी किया गया था। इसके बाद स्थानीय लोगों और किसानों द्वारा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से रेत निकालने पर सख्त कार्रवाई की गई। पुलिस और प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए सैकड़ों ट्रैक्टरों को जब्त किया और भारी जुर्माने लगाए।
लेकिन विडंबना देखिए, जहाँ आम आदमी को अपने निजी मकान निर्माण के लिए एक ट्रॉली रेत नसीब नहीं हो रही है, वहीं प्रशासन के कथित ‘कृपापात्र’ माफियाओं के डंपर रात-दिन मुख्य मार्गों से फर्राटे भर रहे हैं। मुख्य मार्ग से अधूरे अतिक्रमण हटने के बाद से इस अवैध कारोबार में और तेजी आ गई है।

₹8,000 प्रति ट्रॉली: जनता की जेब पर डाका, शासन को करोड़ों का चूना
इस पूरे खेल के कारण क्षेत्र में रेत की कृत्रिम किल्लत पैदा कर दी गई है। मजबूरन आम जनता को अपने घर और मकान के निर्माण के लिए ₹8,000 प्रति ट्रॉली की दर से महंगे दामों पर रेत खरीदनी पड़ रही है।
प्रशासनिक मिलीभगत की चर्चा: स्थानीय स्तर पर यह बात जन-चर्चा का विषय बनी हुई है कि बिना स्थानीय प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस की शह के इतना बड़ा नेटवर्क नहीं चल सकता।
* करोड़ों की राजस्व हानि: इस अवैध उत्खनन से मध्य प्रदेश शासन को हर दिन लाखों और महीने में करोड़ों रुपये के राजस्व (रॉयल्टी) का नुकसान हो रहा है।
* जनप्रतिनिधियों की रहस्यमयी चुप्पी: इस पूरे मामले में क्षेत्र के रसूखदार जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है, जो उनकी भूमिका पर भी बड़े सवाल खड़े करती है।

स्थानीय निवासियों का आक्रोश:
“अगर कोई गरीब अपने घर की मरम्मत के लिए ट्रैक्टर से सूखी रेत ले आए, तो उसे चोर बताकर गाड़ी जब्त कर ली जाती है। लेकिन रसूखदारों के 150-150 डंपर रोज निकल रहे हैं, उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। यह पूरी तरह से दोहरा मापदंड और भ्रष्टाचार है।”

बड़ा सवाल:
क्या कटनी जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारी विजयराघवगढ़ में चल रहे इस संगठित अवैध रेत कारोबार पर संज्ञान लेंगे? क्षेत्र की जनता अब जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर रही है।

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