रीठी में ‘अंधा कानून’: जब सब कुछ दिख रहा है, तो साहब ‘अनजान’ क्यों?

अवैध प्लॉटिंग के खेल में राजस्व अमले की ‘गांधारी’ वाली भूमिका; क्या फाइलों के नीचे दब गई है अफसरों की जवाबदेही?
रीठी/कटनी। कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन कटनी जिले की रीठी तहसील में ऐसा लगता है कि कानून के हाथ ‘अदृश्य बेड़ियों’ से बंधे हुए हैं। यहाँ खेतों में अवैध सड़कों का जाल बिछ गया, कृषि भूमि पर धड़ल्ले से कंक्रीट के जंगल उगने लगे, लेकिन क्षेत्र के पटवारी, आरआई और तहसीलदार को इसकी भनक तक नहीं है। यह ‘अज्ञानता’ कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘प्रशासनिक मौन’ जान पड़ता है।

साहब की नाक के नीचे कट रही कॉलोनियां
हैरत की बात यह है कि जिन स्थानों पर अवैध प्लॉटिंग हो रही है, वे कोई दूर-दराज के बीहड़ नहीं हैं। तहसील मुख्यालय के प्रमुख मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब एक आम आदमी अपने घर की बाउंड्री वॉल बनाता है, तो राजस्व अमला नपाई करने तुरंत पहुँच जाता है, लेकिन जब भू-माफिया पूरी की पूरी कृषि भूमि को ‘प्लॉट’ में बदल रहे हैं, तब अधिकारियों की ‘दिव्य दृष्टि’ गायब हो जाती है।

‘मौन सहमति’ या ‘बड़ा हिस्सा’?
सूत्रों का दावा है कि यह पूरा अवैध कारोबार पटवारी और राजस्व निरीक्षकों की ‘मूक सहमति’ के बिना संभव ही नहीं है। नियम स्पष्ट हैं: बिना डायवर्सन के खेती की जमीन पर व्यावसायिक काम नहीं हो सकता।
बिना रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन के प्लॉट बेचना अपराध है।
नियम विरुद्ध कॉलोनी कटने पर तहसीलदार को पुलिस में FIR दर्ज करानी चाहिए।

परंतु रीठी में इन नियमों को फाइलों के बोझ तले दबा दिया गया है। अधिकारियों का यह ‘अनजान’ बना रहना जनता के मन में गहरे सवाल पैदा कर रहा है। क्या इन अधिकारियों को माफियाओं का खौफ है या फिर भ्रष्टाचार की चादर ने उनकी आँखों पर पट्टी बाँध दी है?

कलेक्टर के आदेशों का ‘मखौल’
मध्य प्रदेश शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध कॉलोनियों के पनपने पर सीधे कलेक्टर की जवाबदेही होगी। लेकिन रीठी के जमीनी हालात बताते हैं कि निचले स्तर का अमला जिला प्रशासन को गुमराह कर रहा है। अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने के बजाय, अधिकारी शायद किसी ‘चमत्कार’ या ‘ऊपर’ से मिलने वाले संकेतों का इंतज़ार कर रहे हैं।

जनता के साथ बड़ा विश्वासघात
अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा उन आम लोगों को भुगतना होगा, जो अपने जीवन की जमा-पूंजी इन अवैध प्लॉटों में लगा रहे हैं। कल को जब नगर परिषद इन क्षेत्रों में सड़क, नाली और बिजली देने से मना करेगी, तब ये ‘अनजान’ अधिकारी अपनी कुर्सी बदलकर कहीं और जा चुके होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *