कटनी [आशीष सोनी] शहर की जीवनरेखा माने जाने वाले तीन प्रमुख रेलवे स्टेशनों (कटनी जंक्शन, कटनी साउथ और मुड़वारा) को जोड़ने वाली 400 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी फ्लाईओवर परियोजना फिलहाल सरकारी फाइलों और कागजी औपचारिकताओं के जाल में उलझ गई है। दो महीने पहले प्रस्ताव तैयार होने के बावजूद, धरातल पर निर्माण की दिशा में एक इंच भी प्रगति नहीं हुई है, जिससे स्थानीय निवासियों और यात्रियों में भारी आक्रोश है।
1. जाम और जलभराव: शहर की दोहरी मार
कटनी शहर वर्तमान में यातायात और जलभराव की गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। इस परियोजना के रुकने से शहर को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:
* टापू बन जाता है शहर: मानसून के दौरान शहर के प्रमुख अंडरपास जलमग्न हो जाते हैं, जिससे शहर दो हिस्सों में बंट जाता है। इस दौरान एम्बुलेंस और स्कूल बसों जैसी आपातकालीन सेवाएं भी घंटों फंसी रहती हैं।
* कनेक्टिविटी का अभाव: कटनी जंक्शन, साउथ और मुड़वारा के बीच कोई सीधा और सुगम मार्ग न होने के कारण, बाहर से आने वाले यात्रियों को एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन जाने के लिए शहर के भारी ट्रैफिक और संकरी गलियों से गुजरना पड़ता है।
* आर्थिक नुकसान: घंटों लगने वाले जाम के कारण न केवल ईंधन की बर्बादी हो रही है, बल्कि स्थानीय व्यापार पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
2. प्रशासनिक सुस्ती या तकनीकी पेंच?
सेतु निगम के एसडीओ प्रमोद गोटिया के अनुसार, विभाग ने गायत्री नगर और मंगलनगर पुलिया क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे पूरा कर लिया है। परियोजना को गति देने के लिए तीन अलग-अलग प्रस्ताव तैयार किए गए हैं।
* ज्योमेट्रिक डिजाइन (JD) का इंतज़ार: तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े निर्माण से पहले जेडी (Geometric Design) की मंजूरी अनिवार्य होती है। वर्तमान में यह प्रस्ताव मुख्यालय में लंबित है।
* DPR और बजट: जेडी की मंजूरी मिलने के बाद ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर बजट आवंटन और टेंडर की प्रक्रिया शुरू होगी।

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
