दो महीने से मना कर रहा किसान, फिर भी नहीं रुका कचरा!

बिलहरी में किसान पिछले करीब दो महीने से लगातार सरपंच और सचिव को अपनी निजी भूमि पर कचरा नहीं डालने की हिदायत दे रहा है। इसके बावजूद पंचायत के सफाई कर्मचारियों द्वारा कचरा फेंकने का सिलसिला जारी है। किसान की आपत्ति को लगातार नजरअंदाज किया जाना पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। आखिर जब जमीन निजी है और मालिक की स्पष्ट सहमति नहीं है, तो वहां कचरा डालने का अधिकार किसने दिया?
कचरे का अंबार, ऑटो स्टैंड के पास फैली गंदगी
मौके पर प्लास्टिक, पॉलीथिन, कागज, खाद्य सामग्री के पैकेट और अन्य कचरे का बड़ा ढेर लगा हुआ है। पास में ऑटो स्टैंड होने के कारण राहगीरों और स्थानीय लोगों को भी परेशानी हो रही है। एक तरफ सरकार स्वच्छता अभियान चलाकर गांवों को साफ रखने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ बिलहरी में निजी खेत को ही कचरा डालने का ठिकाना बनाए जाने का आरोप है।
सचिव बोले—मेरे संज्ञान में मामला नहीं, फिर कौन संभाल रहा पंचायत?
इस मामले में ग्राम पंचायत की सरपंच खुशबू राज नारायण सोनी और सचिव दिनेश पटेल की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। सचिव का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब दो महीने से किसान अपनी समस्या लेकर जिम्मेदारों के पास पहुंच रहा है और मौके पर कचरे का ढेर लगा है, तो फिर पंचायत के सचिव को इसकी जानकारी क्यों नहीं है? क्या पंचायत में होने वाले कामों की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है?
अधिकारियों से कार्रवाई की मांग, किसान को कब मिलेगा न्याय?
निजी जमीन पर मालिक की आपत्ति के बावजूद कचरा डाले जाने के आरोप की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। जनपद पंचायत के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए। साथ ही खेत से कचरा हटवाकर भविष्य में वहां कचरा डालने पर रोक लगाई जानी चाहिए और यदि पंचायत कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल—बिलहरी पंचायत में सरपंच-सचिव की जिम्मेदारी आखिर क्या है? क्या किसान की निजी जमीन को कचरा घर बनाने की खुली छूट मिल गई है? अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कार्रवाई करते हैं या किसान की आवाज इसी तरह अनसुनी होती रहेगी।

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