खाद्य एवं औषधि प्रशासन में पदोन्नति की लिस्टों पर खींचातान: ‘कमाऊ’ जिलों के मोह और राजनीतिक संरक्षण में अटकी ट्रांसफर-पोस्टिंग भोपाल:

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया तीन महीने बीत जाने के बाद भी खींचतान और विभागीय सांठगांठ की भेंट चढ़ी हुई है। विभागीय अधिकारियों और मंत्रियों की मिलीभगत के कारण अधिकारियों की पदस्थापना (स्थानांतरण) की सूची सार्वजनिक नहीं हो पा रही है।

13 जुलाई को हुई थी DPC, अब तक आदेश का इंतजार
विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और औषधि निरीक्षकों की पदोन्नति के लिए 13 जुलाई को विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित की गई थी। इसके बाद से ही खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की न तो नई पदस्थापना की गई है और न ही DPC की सूची सार्वजनिक की गई है।
हालांकि, 17 सितंबर को राज्य मंत्री (स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बयान दिया था कि एक सप्ताह के भीतर पदोन्नति व पदस्थापना के आदेश जारी कर दिए जाएंगे, लेकिन दो महीने बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

ट्रांसफर नीति को दरकिनार करने का खेल
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (और वर्तमान मुख्य सचिव) अशोक वर्णवाल तथा विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह ने नोटशीट में स्पष्ट नियम तय किया था। नियम के तहत:
* जो अधिकारी (खाद्य सुरक्षा अधिकारी व औषधि निरीक्षक) 3 वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही स्थान/जिले में पदस्थ हैं, उन्हें पदोन्नति के बाद अनिवार्य रूप से किसी अन्य जिले में स्थानांतरित किया जाएगा।
* जिनके हाल ही में तबादले हुए हैं और स्वीकृत पदों की संख्या अनुकूल है, उन्हें यथावत रखा जाएगा।

‘मठाधीश’ अधिकारियों का दबाव और मंत्री जी की भूमिका
इस नियम के सामने आते ही कई ऐसे ‘मठाधीश’ अधिकारी, जो पिछले 8 से 10 वर्षों से इंदौर और भोपाल जैसे बड़े व मलाईदार जिलों में जमे हुए हैं, अपने स्थानांतरण को रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने में जुट गए।
आरोप है कि विभागीय मंत्री के कथित समर्थन और प्रभाव के कारण इन नियमों को धता बताने का प्रयास किया गया।

औषधि निरीक्षकों का मामला: 6 अक्टूबर 2026 को जारी की गई औषधि निरीक्षकों की सूची में नियमों को ताक पर रखकर लगभग 8 वर्षों से इंदौर में पदस्थ योगेश गुप्ता का स्थानांतरण नहीं किया गया और उन्हें पदोन्नति के बाद भी इंदौर में ही बनाए रखा गया। आरोप है कि औषधि निरीक्षकों की पूरी लिस्ट केवल प्रभाव और सेटिंग के चलते अटकी हुई थी।

92 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की पदोन्नति भी अटकी
वर्तमान में लगभग 92 से 93 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की पदोन्नति होनी है। हालांकि, इनमें से अधिकांश अधिकारी अपने मौजूदा मनपसंद जिलों को छोड़ना नहीं चाहते। वहीं, कुछ अधिकारी जिनका हाल ही में तबादला हुआ था, वे भी अपने रसूख के बल पर वापस कमाऊ/बड़े जिलों में जाना चाहते हैं।
विभागीय नियमावली और स्थानांतरण के मापदंडों पर मची इसी रस्साकशी और अधिकारियों की लॉबिंग के कारण खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की प्रमोशन लिस्ट अधर में लटकी हुई है।

इधर दागियों को भी पदोन्नति देने की तैयारी
सूत्रों की माने तो दागियों को भी पर्दे के पीछे पदोन्नति देने की तैयारी है। जिन अधिकारियों के प्रकरण ईओडब्ल्यू में चल रहे हैं। उसे भी निजी हित के चलते पदोन्नति का लाभ देने की बात सामने आ रही है।

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