अब पंचायत भवन से ही करना होगा कार्यालय का संचालन, जनपद पंचायत सीईओ करेंगे औचक निरीक्षण; लापरवाही मिलने पर होगी कार्रवाई
भोपाल/ मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के दौरान ग्राम पंचायतों के कामकाज में सामने आई कमियों के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पंचायत भवन तैयार होने के बाद ग्राम पंचायत का कार्यालय वहीं से संचालित करना अनिवार्य होगा। अब सरपंच, पंचायत सचिव और रोजगार सहायक घरों से पंचायत कार्यालय नहीं चला सकेंगे। साथ ही सरकारी दस्तावेज, कंप्यूटर, फर्नीचर और अन्य सामग्री भी पंचायत भवन में ही रखनी होगी।
विभाग ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। जनपद पंचायत के सीईओ अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायतों का औचक निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगे कि पंचायत भवन नियमित रूप से खुल रहे हैं और वहां कार्यालयीन कामकाज हो रहा है या नहीं।
तीन बिंदुओं पर होगी जांच
औचक निरीक्षण के दौरान मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा। पहला, पंचायत भवन नियमित रूप से खुलता है या नहीं। दूसरा, सरपंच, पंचायत सचिव और रोजगार सहायक निर्धारित समय पर कार्यालय में उपलब्ध रहते हैं या नहीं। तीसरा, पंचायत के आवश्यक दस्तावेज, कंप्यूटर, फर्नीचर और अन्य सरकारी सामग्री भवन में रखी गई है या नहीं।
यदि पंचायत कार्यालय नियमित रूप से संचालित नहीं होता या पंचायत सचिव और रोजगार सहायक बिना अनुमति अनुपस्थित पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। विभाग का उद्देश्य पंचायत स्तर पर कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराना है।
पंचायत भवनों के बजाय घरों में मिल रही थी सरकारी सामग्री
मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के दौरान सामने आया कि कई स्थानों पर पंचायत कार्यालय आवासों से संचालित हो रहे थे। कहीं सरकारी दस्तावेज तो कहीं फर्नीचर, टीवी, कंप्यूटर और अन्य सामग्री पंचायत भवन के बजाय संबंधित लोगों के घरों में रखी मिली। विभाग ने इसे प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से गंभीर माना है।
पंचायत भवनों का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके गांव में ही सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन कार्यालय नियमित रूप से नहीं खुलने और जिम्मेदार कर्मचारियों के उपलब्ध नहीं रहने से ग्रामीणों को अपने काम के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। इससे समय और संसाधनों की बर्बादी के साथ पंचायत के कामकाज में पारदर्शिता भी प्रभावित हो सकती है। नए निर्देशों के तहत पंचायत भवन में नियमित कार्यालय संचालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
25 दिसंबर को 2,472 नए पंचायत भवनों का लोकार्पण
दूसरी ओर, प्रदेश में पंचायतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर 2,472 नए पंचायत भवनों का लोकार्पण प्रस्तावित है। पंचायत भवनों के पारंपरिक डिजाइन में बदलाव करते हुए अब दो मंजिला भवन भी बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक भवन के लिए 37.50 लाख रुपये स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसके अलावा ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 25 लाख से 48 लाख रुपये तक की लागत से 3,700 से अधिक सामुदायिक भवन भी तैयार कराए गए हैं। इन भवनों का उपयोग स्थानीय जरूरतों के अनुसार किया जा सकता है।
अब भवन नहीं, नियमित संचालन होगा असली कसौटी
प्रदेश में नए पंचायत भवनों का निर्माण ग्रामीण प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन इनका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब भवनों में नियमित रूप से कार्यालय संचालित होंगे और जिम्मेदार कर्मचारी निर्धारित समय पर उपलब्ध रहेंगे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि औचक निरीक्षण कितने नियमित होते हैं और विभाग के निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना पालन सुनिश्चित किया जाता है।

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
