पेट्रोलियम मंत्रालय के नियमों की उड़ रही धज्जियां, उपभोक्ताओं में आक्रोश; खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
कटनी/ शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक संचालित पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को मिलने वाली अनिवार्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रतिदिन हजारों वाहन चालक पेट्रोल-डीजल भरवाने पंपों पर पहुंचते हैं, लेकिन कई स्थानों पर उन्हें नियमानुसार मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इसके बावजूद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नियमों के तहत सुविधाएं देना अनिवार्य
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। इनमें वाहनों के लिए निःशुल्क हवा, पीने का स्वच्छ पानी, महिला एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग साफ-सुथरे शौचालय, प्राथमिक उपचार पेटी और शिकायत पुस्तिका प्रमुख हैं। इसके अलावा ईंधन की मात्रा, गुणवत्ता और निर्धारित कीमतों की जानकारी प्रदर्शित करना तथा अग्निशमन उपकरण एवं पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी जरूरी है।
सुविधाओं के नाम पर हो रही खानापूर्ति
शिकायतों के अनुसार, कई पेट्रोल पंपों पर पीने के स्वच्छ पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। शौचालयों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई जा रही है। वहीं, कुछ स्थानों पर हवा भरने की मशीनें खराब पड़ी रहती हैं, जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए उपलब्ध सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच भी जरूरी है।
निरीक्षण और कार्रवाई का इंतजार
स्थानीय नागरिकों एवं वाहन चालकों का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर सुविधाओं की कमी को लेकर कई बार आवाज उठाई जा चुकी है, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण क्यों नहीं किया जा रहा है? क्या पेट्रोल पंपों की सुविधाओं की जांच केवल कागजों तक सीमित है?
औचक निरीक्षण कर हो कार्रवाई
नागरिकों ने जिला प्रशासन एवं खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों से जिले के सभी पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही जहां अनिवार्य सुविधाओं का अभाव मिले, वहां संचालकों को तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए जाएं तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को उनका अधिकार मिल सके।

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
