महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय (करौंदी, जिला कटनी) एक बार फिर अपने अध्ययन केंद्रों के संचालन और प्रशासनिक रवैये को लेकर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। सागर स्थित अध्ययन, प्रवेश एवं परीक्षा केंद्र के संचालक ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कुलगुरु, कुलसचिव और उपकुलसचिव (प्रशासन) को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि यदि उनके केंद्र को नियमानुसार लिखित अनुमति और अधिकार पत्र जल्द जारी नहीं किया गया, तो भविष्य में होने वाले किसी भी न्यायिक विवाद या जाँच की पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रबंधन की होगी।
सालों से सिर्फ ‘आश्वासन का खेल’, लिखित आदेश गायब
शिकायतकर्ता के अनुसार, विश्वविद्यालय के उपकुलसचिव (प्रशासन) और अन्य सक्षम अधिकारी पिछले कई वर्षों से उन्हें केंद्र संचालन की अनुमति और उनके पदनाम को बहाल करने का सिर्फ मौखिक आश्वासन दे रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन एक तरफ शासन और अन्य मंचों पर यह दावा करता है कि ‘महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय अधिनियम 37 (वर्ष 1995)’ के तहत उनका कार्यक्षेत्र संपूर्ण मध्य प्रदेश है, लेकिन दूसरी तरफ अपने ही पुराने केंद्रों को वैध और संवैधानिक अधिकार पत्र देने में आनाकानी कर रहा है।
उच्च न्यायालय और UGC के नियमों का हवाला
पत्र में माननीय उच्च न्यायालय (ग्वालियर पीठ) की डिवीजन बेंच द्वारा प्रकरण क्रमांक WA-29/2025 में दिनांक 15 जुलाई 2025 को पारित आदेश का भी संदर्भ दिया गया है। केंद्र संचालक ने मांग की है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशा-निर्देशों सहित UGC विनियम 2003 और ‘प्रोफेसर यशपाल बनाम अन्य’ के ऐतिहासिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में उनकी वास्तविक स्थिति को स्पष्ट किया जाए। उन्होंने मांग की है कि उनके पदनाम के साथ तत्काल केंद्र संचालन का आधिकारिक नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाए।
तो जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रबंधन की होगी
केंद्र संचालक ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि आज दिनांक तक उन्हें नियमानुसार और संवैधानिक तौर पर कोई अधिकार पत्र नहीं दिया गया है, बल्कि सिर्फ अंधेरे में रखा जा रहा है। यदि इस लापरवाही के कारण भविष्य में कोई कानूनी पेच फंसता है, न्यायालय में विवाद होता है या शासन स्तर पर कोई जाँच बैठती है, तो इसके लिए पूरी तरह से विश्वविद्यालय प्रशासन जिम्मेदार होगा।
अब देखना यह है कि कटनी स्थित मुख्य परिसर का प्रबंधन इस गंभीर और तीखे पत्र के बाद क्या कदम उठाता है।

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
