महर्षि महेश योगी वैदिक विवि की डिग्रियों की वैधता पर गंभीर सवाल

बालाघाट एसपी ने कटनी कलेक्टर को अप्रैल माह में लिखा था पत्र

बालाघाट के छात्र आशीष धुर्वे द्वारा की गई बिंदुवार तथ्यात्मक शिकायत बनी गले की फांस

महर्षि महेश योगी के सपनों को धूमिल कर रहा विवि प्रबंधन

कटनी/बालाघाट। महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय करौन्दी (कटनी) द्वारा जारी की जा रही अंकसूचियों और डिग्रियों की प्रामाणिकता विवादों में आ गई है। सीधा सवाल उठने लगा है कि क्या विवि प्रबंधन के लोग महर्षि महेश योगी के सपनों को धूमिल कर रहे हैं। दरअसल बालाघाट के छात्र आशीष धुर्वे ने पुलिस अधीक्षक (SP) बालाघाट को एक बिंदुवार तथ्यात्मक शिकायत की है। जिसकी प्राथमिक जांच के बाद पुलिस अधीक्षक (SP) बालाघाट ने आगामी वैधानिक कार्रवाई और सघन जांच के लिए मामला सीधे कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कटनी को प्रेषित कर दिया है। यह पत्र 10 अप्रैल 2026 को भेजा गया है। इसके पीछे बड़ा कारण यह है कि विश्वविद्यालय का मुख्यालय कटनी जिले के करौन्दी में स्थित है, इसलिए अब इस कथित बड़े फर्जीवाड़े या प्रशासनिक लापरवाही की जांच की कमान कटनी जिला प्रशासन के हाथों में आ गई है।

एसपी बालाघाट ने कटनी कलेक्टर को सीधे लिखा पत्र
पुलिस अधीक्षक कार्यालय बालाघाट द्वारा जारी आधिकारिक पत्र (क्रमांक पुअ/बाला/शिका/जनता/662/2026) के माध्यम से कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कटनी को मूल शिकायत भेजकर वैधानिक कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि आवेदक आशीष धुर्वे (निवासी सुरभि नगर, बालाघाट) ने विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा जारी अंकसूची एवं उपाधि की मान्यता व वैधता को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। चूंकि आरोपी संस्थान कटनी जिले के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए नियमानुसार आगे की जांच कटनी कलेक्टर द्वारा की जाएगी।
इसकी एक प्रतिलिपि थाना प्रभारी कोतवाली के माध्यम से शिकायतकर्ता छात्र को भी सूचनार्थ भेजी गई है।

क्यों शुरू हुई यह जांच? सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
यह पूरी कार्रवाई माननीय उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय ‘ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ के तहत जारी पुलिस मुख्यालय (अपराध अनुसंधान विभाग) मध्य प्रदेश के परिपत्रों के आलोक में की जा रही है। छात्र आशीष धुर्वे (सत्र 2022, BSW कोर्स) ने शिकायत में आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा नियमों को ताक पर रखकर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
यूनिवर्सिटी पर लगे ये 4 गंभीर आरोप, जिसकी होगी जांच:
* वैधानिक दर्जे (Status) को लेकर भारी भ्रम: यूनिवर्सिटी खुद को शासकीय बताती है या निजी, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है। जबकि यूजीसी के पत्र (दिनांक 07.11.2014) के मुताबिक, स्ववित्त पोषित होने के कारण इसे ‘राज्य निजी विश्वविद्यालय’ की श्रेणी में शामिल किया गया था। यूनिवर्सिटी इसके गठन से जुड़ी राज्य सरकार की अधिसूचनाएं सामने नहीं रखती।
* यूजीसी रेगुलेशन 2003 का उल्लंघन: विश्वविद्यालय द्वारा निजी विवि के संचालन हेतु तय यूजीसी नियमों (विशेषकर धारा 12 और 15) का पालन नहीं किया गया, जिससे इसके द्वारा जारी डिग्रियों की वैधता पर सीधे तौर पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
* बिना अनुमति के बाहरी परीक्षा केंद्र: शिकायतकर्ता छात्र की अंकसूची में परीक्षा केंद्र का नाम ही गायब है। नियमों के विपरीत जाकर विश्वविद्यालय मुख्यालय (कटनी) के बाहर बालाघाट में परीक्षा केंद्र बनाकर परीक्षाएं आयोजित की गईं।
* बिना मंजूरी के वोकेशनल और टेक्निकल कोर्स: विवि के मूल अधिनियम 37 (वर्ष 1995) में बिना किसी वैधानिक संशोधन या उच्च शिक्षा मंत्रालय की अनुमति के कई तरह के प्रोफेशनल और वोकेशनल कोर्स संचालित कर विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया।

अब कटनी प्रशासन पर टिकी निगाहें
बालाघाट पुलिस द्वारा गेंद कटनी कलेक्टर के पाले में डाले जाने के बाद, अब शिकायतकर्ता ने मांग की है कि विश्वविद्यालय के करौन्दी (कटनी) स्थित मुख्यालय और जबलपुर स्थित प्रशासनिक कार्यालय का भौतिक निरीक्षण कर सघन जांच की जाए। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद कटनी के शिक्षा जगत और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।

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