गांवों से शहर आ रहे दूध में मिलावट का खेल जोरों पर, खोवा-पनीर की शुद्धता पर भी उठे गंभीर सवाल
कटनी/शहर में दूध की मांग पूरी करने के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले दूध में मिलावट का धंधा बेलगाम हो गया है। मुनाफे के लालच में कुछ लोग दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए अमानक और हानिकारक चीजें मिला रहे हैं, जो सीधे तौर पर आम जनता की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ है।
कहां है खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी?
ग्रामीण अंचलों से हर रोज सुबह पिकअप वाहनों, बाइकों और अन्य माध्यमों से हजारों लीटर दूध कटनी शहर की डेयरियों और दुकानों तक पहुंचता है।
शहर में प्रवेश करने वाले इस दूध की गुणवत्ता की जांच शहर के बॉर्डर या संग्रहण केंद्रों पर नहीं हो रही है।
बिना किसी नियमित चेकिंग और सैंपलिंग के यह संदिग्ध दूध सीधे लोगों के घरों, चाय की दुकानों और होटलों तक पहुंच रहा है।
दूध खराब तो मिठाइयां और खोवा कैसे शुद्ध?
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इसी मिलावटी दूध से शहर में खोवा, पनीर और मिठाइयां तैयार की जा रही हैं। जब कच्चे माल यानी दूध की गुणवत्ता ही संदिग्ध है, तो उससे बनने वाले खाद्य पदार्थों की शुद्धता पर सवाल उठना लाजिमी है। आम आदमी पैसों का पूरा भुगतान करने के बावजूद अपने परिवार को जहर परोसने पर मजबूर है।
पुरानी सक्रियता गायब, अफसर सुस्त
स्थानीय लोगों और बुजुर्गों का कहना है कि कुछ साल पहले तक चांडक चौक और शहर के प्रमुख बाजारों में खाद्य विभाग की तरफ से हर हफ्ते दूध विक्रेताओं की औचक चेकिंग होती थी। इससे मिलावटखोरों में डर बना रहता था। लेकिन वर्तमान में मैदानी अमले की सुस्ती और विभागीय लापरवाही के कारण मिलावटखोरों के हौसले पूरी तरह बुलंद हैं।
गांवों से शहर आने वाले दूध वाहनों और संग्रहण केंद्रों की औचक जांच शुरू की जाए।
शहर की सभी डेयरियों और मिष्ठान भंडारों से दूध व खोवे के सैंपल लेकर लैब जांच कराई जाए।
मिलावटखोरी में लिप्त पाए जाने वाले लोगों पर तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
