ढीमरखेड़ा (कटनी)। एक तरफ सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी विभाग ही विकास के नाम पर हरे-भरे जंगलों को जड़ से उखाड़ने में तुले हैं। ताजा मामला राज्य वन विकास निगम के ढीमरखेड़ा तहसील का है, जहां BSNL द्वारा नेटवर्क विस्तार के लिए बिछाई जा रही केबल लाइन ने प्राकृतिक संपदा को भारी नुकसान पहुंचाया है।
दादर सिहुडी से महंगवा (देंगवां) तक नेटवर्क केबल डालने का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के लिए जंगल के बीचों-बीच से जेसीबी जैसी भारी मशीनों द्वारा गहरी नाली खोदी जा रही है। लापरवाही की हद यह है कि लाइन के रास्ते में आने वाले सालों पुराने फलदार और छायादार पेड़ों को बचाने के बजाय, उन्हें मशीनों से सीधा जड़ से उखाड़ फेंका जा रहा है। जिस वृक्ष को तैयार होने में दशकों लग जाते हैं, उन्हें चंद मिनटों की खुदाई में धराशायी किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जंगल के भीतर मशीनों से इतनी बड़ी खुदाई हो रही है और वन विभाग के मैदानी अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब या तो विभागीय लापरवाही का नतीजा है या फिर इसमें अधिकारियों की मौन सहमति है। वन्यजीवों और वन संपदा की सुरक्षा का दायित्व निभाने वाला विभाग आखिर इस विनाश को नजरअंदाज कैसे कर सकता है?
“यह मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं था। आपके माध्यम से जानकारी मिली है, मैं तत्काल टीम भेजकर इसकी जांच करवाता हूं और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।”
राज्य वन विकास निगम रेंजर सैय्यद जुनैद

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
