स्टॉक ट्रांसफर का बड़ा कागजी खेल उजागर: फिर भी कटनी, रीवा, मैहर और सतना की संदिग्ध खदानों का हिसाब नहीं ले सका खनिज विभाग

कटनी के कारोबारी मनोज जैन की तीन गाड़ियां मैहर में पकड़े जाने के बाद सामने आई थी हकीकत; अब माफिया को डंके की चोट पर संरक्षण देने का आरोप, मामला ठंडे बस्ते में
सतना/कटनी/मैहर।
भंडारण केंद्रों (स्टॉक यार्ड) की आड़ में सिर्फ कागजी ट्रांसफर दिखाकर चोरी के खनिज (लेटेराइट एवं बॉक्साइट) को सीमेंट प्लांटों में खपाने और इसे मैहर-सतना के रास्ते नेपाल एक्सपोर्ट करने के गंभीर मामले का भंडाफोड़ होने के बाद भी प्रशासनिक सुस्ती कई सवाल खड़े कर रही है। दरअसल, इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ और असली हकीकत तब सामने आई थी, जब कटनी के खनिज कारोबारी मनोज जैन की तीन गाड़ियां मैहर में रंगे हाथों पकड़ी गई थीं।
मैहर में हुई इस बड़ी जब्ती के बाद सिंडिकेट का पूरा चेहरा बेनकाब हो गया था, लेकिन इसके बावजूद खनिज विभाग और उनकी टीम तकरीबन 3 हफ्ते बीत जाने के बाद भी रीवा, कटनी, मैहर और सतना की संदिग्ध खदानों से स्टॉक का वास्तविक हिसाब नहीं ले पाई है। जांच के नाम पर हो रही नौटंकी और बड़ी-बड़ी बातों के बीच असलियत यह है कि भारी राजस्व क्षति से जुड़ा यह गंभीर मसला अब खनिज विभाग कार्यालय की डस्टबिन में डंप होता नजर आ रहा है। आरोप लग रहे हैं कि यह कृत्य सरेआम मिनरल्स माफिया और खनिज चोरों को डंके की चोट पर संरक्षण देने जैसा है।

मैहर की जब्ती से खुली थी पोल, पर अब कहाँ गए वो तेवर?
खनिज कारोबारी मनोज जैन की तीन गाड़ियों के मैहर में पकड़े जाने के बाद बड़े पैमाने पर खनिज की चोरी और सरकार को लग रही भारी चपत के खिलाफ एक बड़ी मुहिम की उम्मीद जागी थी। इस कार्यवाही के बाद ही खनिज विभाग की टीम ने आधा दर्जन खनिज भंडारण केंद्रों का स्थल निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने खुद दावा किया था कि चोरी के खनिज में भारी गोलमाल हुआ है और प्रथम दृष्टया बड़ी गफलत पकड़ी गई है।
इसके बाद रीवा, कटनी, मैहर और सतना के उन खदान संचालकों से भी ब्योरा तलब किया गया था, जहां से इन भंडारण केंद्रों में खनिज के स्टॉक का ट्रांसफर दिखाया गया था। मगर, मैहर से शुरू हुई इस शुरुआती सख्ती के बाद अचानक जांच ठंडी पड़ गई है। इस संबंध में जब जिला खनिज अधिकारी से मोबाइल पर संपर्क कर कार्रवाई की प्रगति जाननी चाही, तो उनकी तरफ से कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला।

खनिज कार्यालय के काबू में नहीं हैं माइंस होल्डर!
जानकारों का सीधा कहना है कि ‘एक थैली के चट्टे-बट्टे’ की तर्ज पर जिला खनिज कार्यालय का कतिपय स्टाफ संदिग्ध किस्म के खनिज संचालकों पर मेहरबान है और उन पर जोर नहीं चला पा रहा। यही वजह है कि पूरे संभाग और जिले के चिह्नित भंडारण केंद्रों में स्टॉक ट्रांसफर का इतना बड़ा कागजी खेल पकड़े जाने के बाद भी खनिज विभाग की रुचि जांच को आगे बढ़ाने में नहीं दिख रही है।
दिखावे के लिए नोटिस तो काट दिए गए, लेकिन अब उनसे हिसाब लेने की नौबत ही नहीं आने दी जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि:
आखिर इन भंडारण केंद्रों में रीवा, कटनी, मैहर और सतना की खदानों से सिर्फ कागजों पर ही खनिज क्यों ट्रांसफर किया गया?
उन संबंधित खदानों की भौतिक स्थिति क्या है?
खनिज के परिवहन में किन वाहनों का प्रयोग किया गया और इसके लिए काटी गई ई-टीपी (e-TP) की वास्तविक स्थिति क्या है?
इन सुलगते सवालों के जवाब अब तक नदारद हैं।

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