संतों के चरण पूजन से अधिक उनके आचरण का अनुसरण जरूरी : पंडित नीरज देव प्रभाकर शास्त्री

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पूज्य गुरुदेव पंडित देव प्रभाकर शास्त्री ‘दद्दा जी’ की पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ मनाई गई
कटनी, / अध्यात्म, सेवा और लोककल्याण के प्रतीक पूज्य गुरुदेव पंडित देव प्रभाकर शास्त्री ‘दद्दा जी’ की पुण्यतिथि देश, प्रदेश के साथ कटनी में भी श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर देव बृहस्पति दद्दा जी मंदिर एवं समाधि स्थल पर दिनभर धार्मिक आयोजनों का क्रम चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई।
पुण्यतिथि के अवसर पर प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं का मंदिर परिसर में आगमन प्रारंभ हो गया। भक्तों ने श्रद्धा भाव से पार्थिव शिवलिंग निर्माण किया तथा विधिवत पूजन-अर्चन किया। निर्मित शिवलिंगों का रुद्राभिषेक विद्वान आचार्य पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया। पूरे वातावरण में मंत्रध्वनि और भक्ति भाव की गूंज से आध्यात्मिक माहौल निर्मित हो गया।
दिनभर पूज्य दद्दा जी की समाधि स्थल पर दर्शन एवं पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
सायंकाल श्री रंगनाथ भजन परिवार द्वारा सुंदरकांड पाठ एवं भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। भक्ति संगीत और रामनाम संकीर्तन से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भजनों पर भावविभोर होकर झूमते नजर आए। कार्यक्रम के अंत में भव्य महाआरती संपन्न हुई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भाग लिया।
इस अवसर पर आयोजित विशाल भंडारा दोपहर से प्रारंभ होकर देर रात तक चलता रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण कर गुरु सेवा एवं समरसता का संदेश आत्मसात किया।
कार्यक्रम के दौरान छोटे भैया पंडित नीरज देव प्रभाकर शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि केवल संतों के चरणों की पूजा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्श आचरण को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धा और भक्ति है। उन्होंने कहा कि संत-महात्मा अपने जीवन से त्याग, सेवा, सदाचार और मानव कल्याण का संदेश देते हैं। यदि समाज उनके बताए मार्ग को अपनाए तो व्यक्ति एवं समाज दोनों का जीवन धन्य और सफल बन सकता है।उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि गुरु परंपरा की शिक्षाओं को व्यवहारिक जीवन में अपनाकर सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाएं पुण्यतिथि आयोजन में क्षेत्र के श्रद्धालु, शिष्यगण एवं भक्तजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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