भारत कटनी: सिस्टम की लापरवाही से 7.29 करोड़ का धान सड़ा, 5 साल बाद भी अनाज को नहीं नसीब हुई छत

गो-ग्रीन वेयर हाउसेस प्राइवेट लिमिटेड के आगे पूरा सिस्टम नतमस्तक
कटनी। जिले में सरकारी सिस्टम की बड़ी लापरवाही के कारण अन्नदाता की मेहनत सड़कर मिट्टी हो गई है। समर्थन मूल्य पर खरीदा गया 7 करोड़ 29 लाख रुपये का धान खुले आसमान के नीचे पड़े-पड़े बर्बाद हो गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि प्रशासन बीते 5 वर्षों में इस अनाज को सुरक्षित रखने के लिए गोदामों में जगह तक उपलब्ध नहीं करा सका।

5 साल की अनदेखी का नतीजा
जिले में वर्ष 2021-22 में खरीदे गए धान को भंडारण की कमी के कारण गोदामों में नहीं भेजा जा सका। प्रशासन की उदासीनता का आलम यह रहा कि फरवरी 2026 तक यह कीमती उपज जिले के 7 अलग-अलग ओपन कैप (खुले केंद्रों) में पड़ी रही। उचित सुरक्षा और उठाव न होने के कारण यह धान पूरी तरह सड़ चुका है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत 7 करोड़ 29 लाख रुपये बताई जा रही है।

इन केंद्रों पर हुआ सबसे ज्यादा नुकसान
बर्बादी की यह तस्वीर जिले के इन प्रमुख केंद्रों पर साफ देखी जा सकती है:
* कटनी मंडी अस्थाई कैप
* मार्कफेड ओपन कैप मझगवां
* मप्र वेयरहाउस लॉजिस्टिक कारपोरेशन बहोरीबंद
* मनरेगा ओपन कैप बहोरीबंद
* रीठी और बरही मंडी के अस्थाई केंद्र
* बड़गांव मंडी अस्थाई कैप

गेहूं की बर्बादी का आंकड़ा भी बड़ा
धान के अलावा रीठी, मझगवां और बहोरीबंद में भंडारण के अभाव में 13 करोड़ 93 लाख 95 हजार रुपये का गेहूं भी खराब हुआ है। मप्र वेयरहाउस एंड लॉजिस्टिक द्वारा 5 साल तक अनाज को खुले में छोड़ने के कारण यह भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने का खेल
इस गंभीर लापरवाही के लिए गोग्रीन वेयर हाउसेस प्राइवेट लिमिटेड जैसी एजेंसियों के खिलाफ बडवारा, बहोरीबंद, रीठी और बरही थानों में केस दर्ज किए गए हैं। हालांकि, मामला हाई कोर्ट में लंबित होने के कारण अब तक किसी भी बड़े अधिकारी पर गाज नहीं गिरी है। डर इस बात का है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक कई जिम्मेदार अफसर रिटायर या ट्रांसफर हो चुके होंगे।

वर्तमान स्थिति: अभी भी खुले में है 15 हजार मीट्रिक टन धान
इतनी बड़ी बर्बादी के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा है। वर्ष 2025-26 की खरीदी का 15,301 मीट्रिक टन धान वर्तमान में भी खुले आसमान के नीचे रखा है। गोदाम न होने और परिवहन में देरी के कारण इसे केवल तिरपाल से ढंककर बचाने की कोशिश की जा रही है, जो बारिश और नमी के कारण फिर से खराब होने की कगार पर है।

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