मप्र हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: तलाकशुदा बेटी भी फैमिली पेंशन की हकदार
अभी तक सिर्फ अविवाहित और विधवा बेटियों को मिलता था लाभ
जबलपुर/ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि तलाकशुदा बेटी भी अपने माता-पिता की फैमिली पेंशन पाने की हकदार है। अदालत ने भारतीय संविधान में दिए गए समानता के अधिकार का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि तलाकशुदा बेटी को परिवार की परिभाषा से बाहर रखना तार्किक नहीं है।
जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि जब अविवाहित, विधवा और विवाहित बेटियों को परिवार का हिस्सा माना गया है, तो तलाकशुदा बेटी को इससे अलग रखने का कोई उचित आधार नहीं बनता। अदालत ने राज्य शासन को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर फैमिली पेंशन का लाभ प्रदान किया जाए।
जबलपुर निवासी ज्योति द्वारा दायर याचिका में बताया गया कि उनके पिता होमगार्ड विभाग में पदस्थ थे। 30 अप्रैल 2001 को सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपनी बेटी को फैमिली पेंशन के लिए नॉमिनी बनाया था। इसके बावजूद उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा था, जिसके बाद वर्ष 2022 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
अदालत ने अपने आदेश में मप्र सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के नियम 44(5) और 48(11) का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नियमों में अविवाहित, विधवा और विवाहित बेटियों को परिवार का सदस्य माना गया है, लेकिन तलाकशुदा बेटी का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। कोर्ट ने कहा कि विवाह की स्थिति के आधार पर बेटियों के अधिकारों में भेदभाव नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि विवाहित बेटी को परिवार का सदस्य माना जा सकता है, तो तलाकशुदा बेटी को इस अधिकार से वंचित करना संविधान के समानता के सिद्धांत के विपरीत होगा। इस फैसले को महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
