नई व्यवस्था के तहत श्रद्धालु निर्धारित शुल्क देकर सीधे गर्भगृह में पहुंचकर भगवान कालभैरव के दर्शन कर सकेंगे। हालांकि उन्हें मंदिर में मदिरा भोग चढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। सामान्य दर्शन व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी और आम श्रद्धालुओं को कतार में लगकर दर्शन करने होंगे।
मंदिर प्रशासन के अनुसार सुबह 6 बजे से शुरू हुई इस व्यवस्था के पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इसका लाभ लिया। सुबह 11.30 बजे तक 20 रसीदें जारी की गईं और 55 श्रद्धालु शीघ्र दर्शन कर चुके थे। मंदिर के पट सुबह 6 बजे से रात 9.30 बजे तक खुले रहते हैं, जबकि आरती के दौरान कुछ समय के लिए दर्शन बंद किए जाते हैं।
मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग रुपए लेकर विशेष दर्शन कराने के नाम पर अवैध वसूली कर रहे थे। इसी को रोकने के लिए मंदिर प्रशासन ने अधिकृत सशुल्क व्यवस्था शुरू की है। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर अपेक्षाकृत छोटा होने के कारण भीड़ और अव्यवस्था रोकने के लिए शुल्क अधिक रखा गया है। जनप्रतिक्रिया के आधार पर आगे शुल्क कम करने पर विचार किया जा सकता है।

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
