कटनी[आशीष सोनी]। शहर इन दिनों धूल और प्रदूषण की बढ़ती समस्या से जूझ रहा है। सड़कों पर उड़ती धूल, निर्माण कार्यों से उठने वाला मलबा और वाहनों की आवाजाही से फैल रहा प्रदूषण शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। हालात यह हैं कि सुबह से लेकर देर शाम तक शहर की कई सड़कों पर धूल का गुबार दिखाई देता है, जिससे आम नागरिकों को सांस लेने में तकलीफ तक होने लगी है।
धूल और प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार लगातार धूल भरे वातावरण में रहने से खांसी, एलर्जी, दमा और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। शहर के कई इलाकों में लोग आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं से भी परेशान हैं।
इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं। सड़कों की समय पर सफाई न होना, निर्माण स्थलों पर मलबे को खुले में छोड़ देना, ट्रकों और भारी वाहनों से गिरती मिट्टी तथा बिना ढके निर्माण सामग्री का परिवहन प्रमुख कारणों में शामिल हैं। यदि इन पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
प्रशासन को चाहिए कि सड़कों की नियमित सफाई और पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए। निर्माण स्थलों पर नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और बिना ढके सामग्री ले जाने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही नगर निगम को शहर में हरियाली बढ़ाने और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण हर नागरिक का अधिकार है। कटनी जैसे बढ़ते शहर में यदि प्रदूषण पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो यह समस्या आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खतरा बन सकती है। इसलिए प्रशासन और नागरिक दोनों को मिलकर इस दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे। तभी शहर को धूल और प्रदूषण की इस बढ़ती समस्या से राहत मिल सकेगी।

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
