बाकल[आशीष सोनी]। एक समय था जब ग्रामीण क्षेत्रों में मनोरंजन के साधन बहुत सीमित हुआ करते थे। उस दौर में कलाकार गांव-गांव जाकर विभिन्न प्रकार की कलाबाजियां और करतब दिखाकर लोगों का मनोरंजन करते थे और इसी माध्यम से अपना भरण-पोषण भी करते थे।
समय बदलने के साथ मनोरंजन के कई आधुनिक साधन उपलब्ध हो गए हैं,लेकिन इसके बावजूद आज भी कुछ कलाकार अपने परिवार और नाबालिग बच्चों के साथ गांवों और सड़कों के किनारे खतरनाक स्टंट और कलाबाजियां दिखाकर लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। पढ़ने-लिखने और खेलने की उम्र में ये बच्चे जोखिम भरे करतब करते नजर आते हैं। सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ऐसे परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।इसके बावजूद कई स्थानों पर बच्चे शिक्षा से दूर रहकर अपने परिवार के साथ गांव-गांव घूमकर कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि इन बच्चों में अद्भुत प्रतिभा और हुनर देखने को मिलता है। लगातार अभ्यास और तैयारी के बाद वे कलाबाजी में निपुण हो जाते हैं। लेकिन इन स्टंटों में खतरा भी कम नहीं होता। कई बार जरा सी चूक बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसके बावजूद जीविका चलाने की मजबूरी के चलते ये परिवार आज भी पारंपरिक तरीके से कलाबाजी दिखाकर लोगों का मनोरंजन करने और अपना गुजारा करने को मजबूर हैं।

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
