विनय जैन, जबलपुर। हर माता-पिता की यह इच्छा होती है कि उनके बच्चे मन लगाकर पढ़ाई करें और जीवन में आगे बढ़ें। जब माता-पिता अपने बेटे या बेटी को अच्छी पढ़ाई करते देखते हैं, तो उन्हें अत्यंत खुशी होती है। लेकिन बच्चों की पढ़ाई के लिए केवल इच्छा ही नहीं, बल्कि एक अच्छा और शांत वातावरण भी अत्यंत आवश्यक है।
विद्या ज्योति हाई स्कूल, भुआ बिछिया के प्राचार्य फा० रंजित लकड़ा ने कहा कि पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल का निर्माण परिवार के प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है। यदि घर के बड़े लोग टीवी देखते रहें और बच्चों से यह अपेक्षा करें कि वे पूरी एकाग्रता से पढ़ाई करें, तो बच्चों का ध्यान किताबों से भटकना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि हम सभी चाहते हैं कि बच्चे पढ़ें, लेकिन कई बार हम स्वयं ही उनके लिए बाधा बन जाते हैं। दिन-रात तेज आवाज में डी.जे. बजना—कभी शादी, कभी जन्मदिन, कभी सालगिरह, कभी रैली, कभी सभाएँ, कभी गृहप्रवेश, कभी क्रियाकर्म, कभी पूजा-पाठ और कभी त्यौहार—यह सिलसिला लगातार चलता रहता है। इसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव पढ़ने वाले बच्चों पर पड़ता है।
प्राचार्य फा० रंजित लकड़ा ने स्पष्ट किया कि सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन आवश्यक है, लेकिन जब किसी भी चीज़ की अति हो जाती है, तो वह समाज और बच्चों के भविष्य—दोनों के लिए नुकसानदायक बन जाती है। उन्होंने समाज से अपील की कि सामाजिक जीवन और बच्चों की शिक्षा के बीच संतुलन बनाए रखें तथा पढ़ाई के लिए शांत और सकारात्मक वातावरण के निर्माण में सहयोग करें।

- स्व. श्री विनोद कुमार बहरे
